Friday, September 28, 2018

सिर्फ वो पाईप बदलकर उसके बदले में पारदर्शी पाईप लगाने की कृपा करें

मुझे सरकार से एक ही बात कहना है कि पेट्रोल पंप पर पेट्रोल  भरने का जो पाईप आता है,वह काले कलर का आता है,सिर्फ वो पाईप बदलकर उसके बदले में पारदर्शी पाईप लगाने की कृपा करें,ताकि पेट्रोल भरते समय वह ग्राहक को दिख सके,कि वाहन में पेट्रोल कितना गिर रहा है ।यदि आप मेरी बात से सहमत हो तो कृपया सभी ग्रुप एवं दोस्तों को भेजने की कृपा करें । धन्यवाद

Thursday, September 20, 2018

अपना दृष्टिकोण सुधारें

मनुष्य का जैसा दृष्टिकोण होता है, वह दुसरो के प्रति जैसा सोचता है, उसी के अनुसार उसके विचार होते है और इनके फलस्वरूप वैसा ही वातावरण व परिस्थितियाँ प्राप्त कर लेता है। दुसरों के दोष_दर्शन, नुक्ताचीनी करने वाले व्यक्ति जहाँ भी जाते हैं, उन्हें अच्छाई नजर ही नहीं आती और लोगों से उनकी नहीं बनती । सबको अच्छी निगाह से देखने पर सरल सात्विक स्वभाव के लोगों को सब जगह अच्छाई ही नजर आती है। बुराई में भी वह ऊँचे आदर्श का दर्शन करते हैं। वास्तव में जिस व्यक्ति के अपने भीतर बुराई रहा करती है, उसे सारा संसार बुरा दीख पड़ता है। मनुष्य अपने अच्छे बुरे दृष्टिकोण को बाह्य परिस्थितियों पर आरोपित करके वैसा ही देखता है। जैसा मनुष्य स्वयं होगा, वैसा ही बाहर देखेगा।
संसार में कोई व्यक्ति ऐसा नहीं, जिसे सब सुख हों, सारी परिस्थितियां मनोवांछित हों, कोई कष्ट न हो कभी असफलता न मिले। जहांँ अनेक
सुख साधन भगवान ने मनुष्य को दिए है, वहाँ कुछ थोड़े अभाव भी रखे है। विवेकशील व्यक्ति
जिवन में उपलब्ध सुख सुविधाओं का अधिक चिंतन
करते हैं और उपलब्धियों पर संतोष प्रकट करते
हुए ईश्वर को धन्यवाद देते रहते हैं। इसके विपरीत अनेक लोग उपलब्ध अनेक सुख साधनों को तुच्छ मानते हैं और जो थोड़े से कष्ट है, अभाव है, उन्हें ही पर्वत तुल्य मानकर अपने आपको भारी विपत्ति ग्रस्त अनुभव करते हैं। ऐसे लोगों की अधिकांश मानसिक शक्ति रोने झींकने में ही चली जाती है  जीवन को शांतिपूर्ण रीती से व्यतीत करने का तरीका यह है कि
जो अपनी कठिनाइयों को बढा चढाकर न आँके। उन्हे उतना ही समझें, जितनी वह वास्तव में है। इससे हमारी अनेक चिंताएँ आसानी से नष्ट हो सकती है। हमें चाहिए कि अपनी कठिनाइयों को बढ़ा चढाकर न देखें, वरन उनको दुसरे आपत्ति ग्रस्त लोगों के साथ तुलना करके अपने आपको अपेक्षाकृत कम दु:खी अनुभव करें। जहाँ हो सके जीवन के प्रति अपना नजरिया या द्रष्टिकोण सकारात्मक रखें।
सुखी जीवन की आकांक्षा सभी को होती है, पर उसकी उपलब्धि तभी संभव है जब हम अपने द्रष्टिकोण की त्रुटियों को समझें और उन्हें सुधारने  का प्रयत्न करें। सुधरा हुआ द्रष्टिकोण स्वल्प साधनों और परिस्थितियों में भी शांति और संतोष को कायम रख सकता है।

Thursday, September 6, 2018

क्रोध त्यागना जरुरी है!

जापान के ओसाका शहर केनिकट किसी गाँव में एक जेनमास्टर रहते थे। उनकी ख्याति पूरेदेश में फैली हुई थी और दूर-दूर से लोग उनसे मिलने और अपनी समस्याओं का समाधान कराने आते थे।
एक दिन की बात है मास्टर अपने एक अनुयायी के साथप्रातः काल सैर कर रहे थे कि अचानक ही एक व्यक्ति उनके पास आया औरउन्हें भला-बुरा कहने लगा। उसने पहले मास्टर के लिए बहुत से अपशब्द कहे, पर बावजूद इसके मास्टर मुस्कुराते हुए चलते रहे। मास्टर को ऐसा करता देख वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गया और उनके पूर्वजों तक को अपमानित करने लगा। पर इसके बावजूद मास्टर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते रहे। मास्टर पर अपनी बातों का कोई असर ना होते हुए देखअंततः वह व्यक्ति निराश हो गया और उनके रास्ते से हट गया।
उस यक्ति के जाते ही अनुयायी ने आस्चर्य से पुछा,“मास्टर आपने भला उस दुष्ट की बातों का जवाब क्यों नहीं दिया, और तो और आप मुस्कुराते रहे,क्या आपको उसकी बातों से कोई कष्ट नहीं पहुंचा ?”
जेन मास्टर कुछ नहीं बोले और उसेअपने पीछे आने का इशारा किया।
कुछ देर चलने के बाद वे मास्टर के कक्ष तक पहुँच गए।
मास्टर बोले,“तुम यहीं रुको मैं अंदर से अभी आया।“
मास्टर कुछ देर बाद एक मैले कपड़े लेकर बाहर आये औरउसे अनुयायी को थमाते हुए बोले, “लो अपने कपड़े उतारकर इन्हे धारण कर लो ?”
कपड़ों से अजीब सीदुर्गन्ध आ रही थी और अनुयायी ने उन्हें हाथ में लेते ही दूर फेंक दिया।
मास्टर बोले, “क्या हुआ तुम इन मैले कपड़ों को नहीं ग्रहण करसकते ना ? ठीक इसी तरह मैं भी उस व्यक्ति द्वारा फेंके हुए अपशब्दों को नहीं ग्रहण कर सकता।
इतना याद रखो कि यदि तुम किसी केबिना मतलब भला-बुरा कहनेपर स्वयं भी क्रोधित हो जाते हो तो इसका अर्थ है कि तुम अपने साफ़-सुथरे वस्त्रों की जगह उसके फेंके फटे-पुराने मैले कपड़ों को धारण कर रहे हो, और ऐसे भी क्रोध करनाछोटेपन की निशानी है और यदि जिंदगी में हमे बड़ा बनना है तो क्रोध त्यागना जरुरी है.. 

Tuesday, September 4, 2018

कुछ तो दया करो।

सभी आदरणीय देशवासियों से अपील करता हूं कि गाड़ी चलाते समय थोड़ा सा ध्यान रखे स्कूल जाने वाले प्यारे बच्चों को इस तरह गंदा ना करे ! ये हमारे देश का भविष्य हे ! आपके पास बड़ी गाड़ियां हैं दिल❤ भी बड़ा रखें🙏🙏🙏 JAGGU

Friday, October 21, 2016

भविष्य क्या है।

अगर वर्तमान का कोई आंकलन नहीं होगा तो भविष्य में कोई निर्णय नहीं हो सकता है|
यह भविष्य क्या है-?
कुछ लोग सोचते हैं कि हाथों की लकीरों में भविष्य होता है| मान लो तो किसी की दुर्घटना हो गयी और डाक्टर ने कहा इसके दोनों हाथ कांटना पड़ेगा और कांट दिया तो क्या उसका कोई भविष्य नहीं है? हाथों की लकीरें में भविष्य नहीं होता है|
भविष्य कर्म में होता है, निर्णय में होता है| अगर वर्तमान में कोई निर्णय किया वो वही आपका भविष्य है| वर्तमान में अगर आप ने गुलामी में रहने का निर्णय किया तो भविष्य में आपके सामने गुलामी होगी अगर आप ने वर्तमान में आजाद होने का निर्णय किया तो दुनिया की कोई भी शक्ति आपको गुलाम बनाने में सफल नहीं हो सकती|